श्री चामुंडा स्थान, पचही: एक अलौकिक आ पावन शक्ति पीठ

मिथिला अनादिकाल सँ शक्ति, भक्ति आ सिद्धाश्रमक केंद्र रहल अछि। एहि कड़ी में मधुबनी (पचही परगना) स्थित **'चामुंडा स्थान'** अपन अलौकिक आ प्रामाणिक कथाक लेल संपूर्ण मिथिलांचल में श्रद्धाक एकटा पैघ केंद्र अछि। एहि सिद्ध पीठक पावन कथा सोलहम शताब्दीक मुगल शासनकाल सँ जुड़ल अछि। #सिद्ध पुरुष वर्धमान उपाध्याय आ हुनकर दिव्य संतान मान्यताक अनुसार, सोलहम शताब्दी में मिथिलाक पचही गाम में महाकर्मकांडी विद्वान आ सिद्ध पुरुष **पंडित वर्धमान उपाध्याय** रहैत छलाह। हुनका तीन टा परम सुंदरी कन्या—जयचामुण्डा (जेठ), जयदुर्गा (मांझिल), जयमंगला (छोट) आ एकटा बालक (पुत्र) छलैन्ह। ई सभ संतान कोनो साधारण बालक नहि, बल्कि दैवीय अंश छलाह। #सतीत्वक रक्षा आ भू-समाधि एक दिन, तिनु बहिन अपन भाईक संग पिताक पूजा-अर्चनाक लेल फूल तोइर रहल छलीह। ताहि समय ओतुका रस्ता सँ मुगल बादशाहक पलटन गुजरि रहल छल। पलटनक सिपाही सभक 'पैशाचिक दृष्टि' जहिना ओहि सुकुमारी सभ पर पड़ल, तिनु बहिन आ भाई अपन सतीत्व आ धर्मक रक्षा लेल कातर भाव सँ प्रार्थना कएलनि: "हे धरती माता! यदि हमरा पूज्य पिताश्रीक भक्ति सत्य अछि, यदि ओ एक सिद्ध पुरुष छथि, तऽ अहाँ हमरा सभक रक्षा करू आ अपना आंचर में समाहित क' लिय। सतीत्वक ओहि पुकार में एहन शक्ति छल जे तत्क्षण पृथ्वी माता फाइट गेलीह आ तिनु बहिन संग भाई कें अपना गर्भ में समा क' हुनक पवित्रताक रक्षा कएलनि। स्वप्नादेश आ माँ गंगाक अवतरण एहि ह्रदयविदारक घटनाक बाद, ओहि राति केँ तिनु बहिन अपन माता कें स्वप्न में दर्शन देलथिन आ कहलथिन—* हम सभ अमुक स्थान पर धरती माएक कोरा में सुरक्षित छी, अहाँ सभ ओतहि हमर पूजा-अर्चना करू।"* भोर भेल तँ ई बात गाम-गाम पसरि गेल। ग्रामीण लोकनि हुनक माता सँ पूजा शुरू करबाक आग्रह कएलखिन। मुदा, ममतामयी माता अपन संतानोंक विछोह सँ आहत छलीह, ओ हठ क' लेलखिन—*"हम तखने पूजा करब, जखन हमर धीया-पुता अपन सत्यताक प्रमाण देताह आ माँ गंगा कें एहि सुदूर स्थान पर बजौतीह। अपन माएक हठ आ भक्ति कें पूरा करबाक लेल भगवती चामुंडा माँ गंगाक आह्वान कएलनि। चामुंडा माएक कृपा सँ माँ गंगा ओहि स्थान धरि प्रवाहित भ' क' अयलीह। ओहि दिव्य प्रवाहक प्रमाण आइयो *'इसराइनक चर'* कें रूप में विद्यमान अछि, जे केहनो भीषण सुखार मे नहि सुखाएत छै। #वर्तमान महत्त्व आ मान्यता एहि अलौकिक घटनाक बाद ई पवित्र स्थल "चामुंडा शक्तिपीठ" कें नाम सँ प्रसिद्ध भेल। #त्रिशक्ति रूप: एतय तिनु बहिन पिंडी रूप में पूजित छथि, जतय जयचामुण्डा, जयदुर्गा आ जयमंगला कें संग हुनक भाईक ओ पूजा होइत अछि। #मनोकामना सिद्धि: एहि सिद्ध पीठक बारे में मान्यता अछि जे जे कोनो भक्त एतय आबि निष्कपट मन सँ माँ चामुंडाक दर्शन करैत छथि, हुनक सभ मनोकामना पूरा होइत अछि।

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