मधुबनी दर्शन, तर्कशास्त्र और वैचारिक परंपरा की महान भूमि

News24mithila.online प्रधान संपादक, प्रशांत कुमार झा, अंधराठाढ़ी प्रखंड के ठाढी प्राथमिक विद्यालय परिसर में कला एवं संस्कृति विभाग तथा जिला प्रशासन द्वारा आयोजित दो दिवसीय भामती वाचस्पति महोत्सव-2026 का शुभारंभरविवार को परिचर्चा सत्र के साथ हुआ। शुभारंभ अवसर पर उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पाण्डेय, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी नीतीश कुमार, भामती वाचस्पति समिति के अध्यक्ष रत्नेश्वर झा, प्रो. देवनारायण झा, प्रो. सुरेश्वर झा, प्रो. दीपनाथ झा सहित अनेक विद्वतजन एवं गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने भामती और वाचस्पति मिश्र की दार्शनिक परंपरा मिथिला की बौद्धिक धरोहर और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। परिचर्चा सत्र में वक्ताओं ने कहा कि मधुबनी केवल कला और लोकसंस्कृति की भूमि ही नहीं, बल्कि दर्शन, तर्कशास्त्र, शास्त्रार्थ और वैचारिक परंपरा की भी एक महान भूमि रही है। वाचस्पति मिश्र और भामती जैसी विभूतियां इस क्षेत्र की उस प्रखर बौद्धिक चेतना का प्रतीक हैं, जिसने भारतीय ज्ञान संपदा को नई दिशा दी। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि ऐसे महोत्सव नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने, सांस्कृतिक अस्मिता को मजबूत करने तथा स्थानीय गौरव को राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं। इस अवसर पर कार्यक्रम से संबंधित महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्री "सर्वतन्त्र स्वतंत्र" का विधिवत विमोचन किया गया। यह डॉक्यूमेंट्री भामती वाचस्पति परंपरा, मिथिला की ज्ञानधारा तथा इस सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न आयामों को प्रभावकारी ढंग से प्रस्तुत करती है। इसके साथ ही स्मारिका "वाचस्पति दर्पण-2026" का भी औपचारिक लोकार्पण किया गया। स्मारिका में महोत्सव, भामती-वाचस्पति परंपरा तथा क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण और शोधपरक आलेख संकलित हैं, जो इस आयोजन को एक स्थायी वैचारिक दस्तावेज का स्वरूप प्रदान करते हैं। महोत्सव में शाम 6 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुरू हुआ। सांस्कृतिक संध्या में क्षेत्रीय लोक संस्कृति, पारंपरिक कला, संगीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मिथिला की जीवंत सांस्कृतिक आत्मा का मनोहारी प्रदर्शन किया।

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