ठाढी में कविश्वर चंदा झा जी की जयंती समारोह का आयोजन

ठाढ़ी स्थित चंदा झा की मुर्ति

माघी सप्तमी के अवसर पर ठाढी स्थित चंदा चौक पर मैथिली साहित्य के मूर्धन्य हस्ताक्षर और मैथिली रामायण के रचनाकार कविश्वर चंदा झा की जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई। समारोह का आयोजन स्थानीय साहित्यिक समिति द्वारा किया गया। आगत कवि अतिथियों और आयोजकों ने कविश्वर चंदा झा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। जयंती समारोह के अंतर्गत साहित्यिक चर्चा और कविगोष्ठी का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा की मैथिली रामायण मिथिला की भाषा और नैतिक दृष्टि में रची-बसी एक मौलिक महाकाव्य थी। इसके साथ ही चंदा झा ने विद्यापति रचित पुरुष-परीक्षा का मैथिली में अनुवाद किया। लक्ष्मीश्वर विलास, गीत-सुधा, गीता सप्तशती, अहिल्याचरित, महेशवाणी और चंद्रपदावली जैसी कृतियों के माध्यम से उन्होंने मैथिली साहित्य को व्यापक विस्तार दिया। वे केवल कवि ही नहीं थे। उन्होंने पूरे मिथिला क्षेत्र में घूम-घूमकर पांडुलिपियाँ, मंदिरों के अभिलेख और ग्राम इतिहास का संग्रह किया। गोष्ठी में प्रमुख उपस्थित कवियों में बबु नंदन झा, संबोध नारायण मिश्र, नारायण यादव, हरिदेव झा, देवानंद मिश्र, राघव रमण, दिनेश कुमार झा, मुकेश कुमार झा शामिल थे। कार्यक्रम का समापन शोभीकांत झा सज्जन के धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया, जिसमें सभी उपस्थित लोगों ने कविश्वर चंदा झा के साहित्यिक योगदान को याद किया। कार्यक्रम में काशीनाथ झा, सुबोध कुमार झा, वरूणदेव झा, रविन्द्र नाथ झा, नमो नारायण झा, सोहन मिश्र, अजीत कुमार झा, बजरंगी आदि उपस्थित थे।


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