अंधराठाढ़ी प्रखंड के ठाढी ग्राम स्थित प्राचीन दुर्गा स्थान में सूर्य महोत्सव के तहत आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा महायज्ञ का समापन सातवें दिन भक्ति, वैराग्य और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हो गया। अंतिम दिन कथावाचक नटवर नारायण दास जी महाराज ने सुदामा चरित्र, उद्धव प्रसंग और राजा परीक्षित को प्राप्त मोक्ष की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथावाचन के दौरान सुदामा-कृष्ण मित्रता का प्रसंग सुनते ही पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कथावाचक ने बताया कि सच्ची मित्रता, प्रेम और भक्ति में कोई भेद नहीं होता। भगवान श्रीकृष्ण ने निर्धन सुदामा को गले लगाकर यह संदेश दिया कि प्रभु के दरबार में धन नहीं, बल्कि निष्कलंक भक्ति का महत्व होता है।
सप्तम दिन मोक्ष प्रसंग के साथ कथा का समापन हुआ। श्रद्धालुओं ने हरिनाम संकीर्तन और जयकारों के बीच पूर्णाहुति में भाग लिया। इस अवसर पर महाप्रसाद का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ का आयोजन प्राचीन दुर्गा पूजा समिति ठाढ़ी द्वारा किया गया था। समिति के सदस्यों ने बताया कि पूरे सप्ताह कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती रही, ग्रामीणों का सहयोग काफी मिला। जिससे क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना रहा। कथा के समापन पर समिति ने सभी सहयोगियों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धर्म और संस्कार के मार्ग पर चलने की अपील की।



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