कथा का हुआ समापन



अंधरा ठाढी स्थित चंदा चौक पर चल रहे संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का वैदिक मंत्रोच्चार के संग गुरुवार को समापन किया गया। कथा के अंतिम दिन पवित्र अग्नि में आहुति देकर इस यज्ञ का पूर्णाहुति किया गया। इस अवसर पर कुमारी कन्या भोज का भी आयोजन किया गया यूनिवर्सिटी कैम्पस दरभंगा से पधारे भागवत भूषण पंडित जानकी शरण 'बालव्यास' महाराज ने अपने शुभ मधुर ओजस्वी वाणी से श्रोताओं को कथा सुनाकर भाव विभोर कर दिया। उन्होंने गोकर्ण धुंधकारी की कथा सुनाकर जनमानस के एकाग्रता पर प्रकाश डाला। ध्रुव, प्रहलाद जी एवं जड़भरत की कथा विस्तार पूर्वक सुनाया और कहा कि ईश्वर के प्रति दृढ़ विश्वास ही भक्ति है जिसके वश में परमात्मा भी हो जाते हैं। नौवें एवं दशवें स्कंद में श्री राम एवं श्री कृष्ण की प्राकट्य लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि एक मर्यादा पुरुषोत्तम है तो दूसरे लीला पुरुषोत्तम हैं । जहाँ प्रेम है वहीं परमात्मा प्रकट होते हैं। प्रेम परमात्मा का स्वरूप है। वाल व्यास जी ने कहा भागवत कथा सुनने के बाद प्राणी में सद्भावना, सत्प्रेम, सेवा एवं सहयोग की भावना आनी चाहिए। कलयुग में भगवान का नाम एवं कथा ही संसार सागर से पर होने का नौका है। यह वो अमृत है जिसे पीने के बाद जीव प्रभु का हो जाता है। ग्रामीण भक्तों के द्वारा आयोजित इस कथा में गणपति झा, अखिलेश झा, ईश्वर नाथ झा, विग्नेश झा, मिथिलेश झा, सोहन मिश्रा, खेलन झा, प्रकाश मिश्रा, प्रभाष झा, रंजन मिश्रा, अजीत झा, अवधेश झा, आदित्य कुमार झा, सुरेश झा, मनीष झा आदि सक्रिय भूमिका निभाई ।

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